ईश्वरप्रत्यभिज्ञाकारिका
Īśvarapratyabhijñākārikā
- 1 ata eva yad apy uktaṃ kriyā naikasya sakramā … इसी कारण विरोधी ने जो भी कहा था — कि 'क्रिया, क्रम-सहित होने से एक की नहीं हो सकती', 'न…
- 2 sakramatvaṃ ca laukikyāḥ kriyāyāḥ kālaśaktitaḥ ghaṭate na tu … और लौकिक क्रिया का क्रमयुक्त होना काल-शक्ति से बनता है;
- 3 kālaḥ sūryādisaṃcāras tattatpuṣpādijanma vā śītoṣṇe vātha tallakṣyaḥ krama … काल सूर्य आदि का संचार है, अथवा उस-उस पुष्प आदि की उत्पत्ति है, अथवा शीत-उष्ण है;
- 4 kramo bhedāśrayo bhedo 'py ābhāsasadasattvataḥ ābhāsasadasattve tu citrābhāsakṛtaḥ … क्रम भेद पर आश्रित है, और भेद भी आभास की सत्ता और असत्ता से (उत्पन्न होता है);
- 5 mūrtivaicitryato deśakramam ābhāsayaty asau kriyāvaicitryanirbhāsāt kālakramam apīśvaraḥ मूर्तियों (आकारों) की विचित्रता से वह (ईश्वर) देश-क्रम को प्रकाशित करता है;
- 6 sarvatrābhāsabhedo 'pi bhavet kālakramākaraḥ vicchinnabhāsaḥ śūnyāder mātur bhātasya … सर्वत्र आभास का भेद भी काल-क्रम का स्रोत हो सकता है — (यह क्रम) उस शून्य आदि के प्रमाता…
- 7 deśakramo 'pi bhāveṣu bhāti mātur mitātmanaḥ svātmeva svātmanā … देश-क्रम भी भावों में उस प्रमाता के लिए प्रतिभासित होता है जिसका स्वरूप मित (सीमित) है;
- 8 kiṃ tu nirmāṇaśaktiḥ sāpy evaṃ viduṣa īśituḥ tathā … किन्तु वह निर्माण-शक्ति भी इस सर्वज्ञ ईश्वर की इस प्रकार है कि ज्ञाता और ज्ञेय का जो भेद…