Verses on the Recognition of the Lord9.2
सक्रमत्वं च लौकिक्याः क्रियायाः कालशक्तितः
घटते न तु शाश्वत्याः प्राभव्याः स्यात् प्रभोर् इव ॥२॥
sakramatvaṃ ca laukikyāḥ kriyāyāḥ kālaśaktitaḥ
ghaṭate na tu śāśvatyāḥ prābhavyāḥ syāt prabhor iva
— क्रमयुक्त होना, सक्रमता ; — और ; — लौकिक (क्रिया) का ; — क्रिया का ; — काल-शक्ति से ; — घटता है, सम्भव होता है (√घट्, आत्मनेपद) ; — किन्तु नहीं ; — शाश्वत (नित्य क्रिया) का ; — प्रभु-सम्बन्धी (क्रिया) का ; — हो (विधि, √अस्) ; — प्रभु के लिए (वह क्रम-रहित होगी) और लौकिक क्रिया का क्रमयुक्त होना काल-शक्ति से बनता है; किन्तु प्रभु की शाश्वत (नित्य) क्रिया का नहीं — उसके लिए तो वह (क्रम-रहित) होगी।