कालः सूर्यादिसंचारस् तत्तत्पुष्पादिजन्म वा
शीतोष्णे वाथ तल्लक्ष्यः क्रम एव स तत्त्वतः ॥३॥
kālaḥ sūryādisaṃcāras tattatpuṣpādijanma vā
śītoṣṇe vātha tallakṣyaḥ krama eva sa tattvataḥ
— काल; — सूर्य आदि का संचार; — उस-उस पुष्प आदि की उत्पत्ति; — अथवा; — शीत और उष्ण (द्विवचन); — अथवा फिर; — उन (चिह्नों) से लक्षित; — क्रम ही; — वह (काल); — वस्तुतः, तत्त्वतः
काल सूर्य आदि का संचार है, अथवा उस-उस पुष्प आदि की उत्पत्ति है, अथवा शीत-उष्ण है; इन (चिह्नों) से लक्षित होने वाला वह काल वस्तुतः क्रम ही है।