Verses on the Recognition of the Lord· 9.3 / 8

Verses on the Recognition of the Lord9.3

9.3
कालः सूर्यादिसंचारस् तत्तत्पुष्पादिजन्म वा शीतोष्णे वाथ तल्लक्ष्यः क्रम एव स तत्त्वतः ॥३॥
kālaḥ sūryādisaṃcāras tattatpuṣpādijanma vā śītoṣṇe vātha tallakṣyaḥ krama eva sa tattvataḥ
— काल ; — सूर्य आदि का संचार ; — उस-उस पुष्प आदि की उत्पत्ति ; — अथवा ; — शीत और उष्ण (द्विवचन) ; — अथवा फिर ; — उन (चिह्नों) से लक्षित ; — क्रम ही ; — वह (काल) ; — वस्तुतः, तत्त्वतः

काल सूर्य आदि का संचार है, अथवा उस-उस पुष्प आदि की उत्पत्ति है, अथवा शीत-उष्ण है; इन (चिह्नों) से लक्षित होने वाला वह काल वस्तुतः क्रम ही है।