ata eva yad apy uktaṃ kriyā naikasya sakramā
eketyādi pratikṣiptaṃ tad ekasya samarthanāt
— इसी कारण; — जो भी; — कहा गया (विरोधी द्वारा) (भूत कृदन्त); — क्रिया; — एक (कर्ता) की नहीं (होती); — क्रमयुक्त होने के कारण; — 'न ही वह एक है'; — इत्यादि — और इसी प्रकार; — खण्डित (भूत कृदन्त); — वह; — एक (प्रमाता) के; — समर्थन (सिद्धि) के कारण
इसी कारण विरोधी ने जो भी कहा था — कि 'क्रिया, क्रम-सहित होने से एक की नहीं हो सकती', 'न ही वह एक है' इत्यादि — वह सब खण्डित हो जाता है, क्योंकि एक (प्रमाता) सिद्ध हो चुका है।