Verses on the Recognition of the Lord· 9.5 / 8

Verses on the Recognition of the Lord9.5

9.5
मूर्तिवैचित्र्यतो देशक्रमम् आभासयत्य् असौ क्रियावैचित्र्यनिर्भासात् कालक्रमम् अपीश्वरः ॥५॥
mūrtivaicitryato deśakramam ābhāsayaty asau kriyāvaicitryanirbhāsāt kālakramam apīśvaraḥ
— मूर्तियों (आकारों) की विचित्रता से ; — देश-क्रम को ; — आभासित करता है (प्रेरणार्थक, √भास्) ; — वह (ईश्वर) ; — क्रियाओं की विचित्रता के निर्भास (प्रकाशन) से ; — काल-क्रम को ; — भी ; — ईश्वर

मूर्तियों (आकारों) की विचित्रता से वह (ईश्वर) देश-क्रम को प्रकाशित करता है; और क्रियाओं की विचित्रता के निर्भास (प्रकाशन) से ईश्वर काल-क्रम को भी प्रकाशित करता है।