sarvatrābhāsabhedo 'pi bhavet kālakramākaraḥ
vicchinnabhāsaḥ śūnyāder mātur bhātasya no sakṛt
— सर्वत्र; — आभास का भेद; — भी; — हो (विधि, √भू); — काल-क्रम का स्रोत (आकर); — जिसका भान विच्छिन्न (टूटा-फूटा) है; — शून्य आदि के; — (सीमित) प्रमाता के; — भासमान, प्रकाशित होने वाले के (भूत कृदन्त); — एक साथ नहीं
सर्वत्र आभास का भेद भी काल-क्रम का स्रोत हो सकता है — (यह क्रम) उस शून्य आदि के प्रमाता के लिए (उत्पन्न होता है) जिसका भान विच्छिन्न (टूटा-फूटा) है, एक साथ नहीं।