Verses on the Recognition of the Lord· 9.6 / 8

Verses on the Recognition of the Lord9.6

9.6
सर्वत्राभासभेदो ऽपि भवेत् कालक्रमाकरः विच्छिन्नभासः शून्यादेर् मातुर् भातस्य नो सकृत् ॥६॥
sarvatrābhāsabhedo 'pi bhavet kālakramākaraḥ vicchinnabhāsaḥ śūnyāder mātur bhātasya no sakṛt
— सर्वत्र ; — आभास का भेद ; — भी ; — हो (विधि, √भू) ; — काल-क्रम का स्रोत (आकर) ; — जिसका भान विच्छिन्न (टूटा-फूटा) है ; — शून्य आदि के ; — (सीमित) प्रमाता के ; — भासमान, प्रकाशित होने वाले के (भूत कृदन्त) ; — एक साथ नहीं

सर्वत्र आभास का भेद भी काल-क्रम का स्रोत हो सकता है — (यह क्रम) उस शून्य आदि के प्रमाता के लिए (उत्पन्न होता है) जिसका भान विच्छिन्न (टूटा-फूटा) है, एक साथ नहीं।