किं तु निर्माणशक्तिः साप्य् एवं विदुष ईशितुः
तथा विज्ञातृविज्ञेयभेदो यद् अवभास्यते ॥८॥
kiṃ tu nirmāṇaśaktiḥ sāpy evaṃ viduṣa īśituḥ
tathā vijñātṛvijñeyabhedo yad avabhāsyate
— किन्तु, परन्तु; — निर्माण-शक्ति; — वह भी; — इस प्रकार; — जानने वाले (ईश्वर) की (परोक्ष भूत कृदन्त, √विद्); — ईशिता (सर्वसमर्थ ईश्वर) की; — इस प्रकार कि; — ज्ञाता और ज्ञेय का भेद; — जो (कि); — प्रतिभासित कराया जाता है (प्रेरणार्थक कर्मवाच्य, √भास्)
किन्तु वह निर्माण-शक्ति भी इस सर्वज्ञ ईश्वर की इस प्रकार है कि ज्ञाता और ज्ञेय का जो भेद है वह भी (उसी के द्वारा) प्रतिभासित कराया जाता है।