The Essence of the Tantra· 9.7 / 53

The Essence of the Tantra9.7

9.7

तत्र शक्तिभेदाद् एव प्रमातॄणां भेदः स च स्फुटीकरणार्थं सकलादिक्रमेण भण्यते तत्र सकलस्य विद्याकले शक्तिः तद्विशेषरूपत्वात् बुद्धिकर्माक्षशक्तीनां प्रलयाकलस्य तु ते एव निर्विषयत्वात् अस्फुटे

Transliteration (IAST)

tatra śaktibhedād eva pramātṝṇāṃ bhedaḥ sa ca sphuṭīkaraṇārthaṃ sakalādikrameṇa bhaṇyate tatra sakalasya vidyākale śaktiḥ tadviśeṣarūpatvāt buddhikarmākṣaśaktīnāṃ pralayākalasya tu te eva nirviṣayatvāt asphuṭe

— शक्ति-भेद से ही ; — प्रमाताओं का भेद ; — स्फुटीकरण (स्पष्ट करने) के लिए ; — सकल आदि क्रम से ; — कहा जाता है ; — सकल की ; — विद्या एवं कला में (सीमित ज्ञान-कर्तृत्व के कञ्चुकों में) ; — शक्ति (निहित है) ; — उसका विशेष-रूप होने के कारण ; — बुद्धि- एवं कर्म-इन्द्रिय की शक्तियों का ; — प्रलयाकल की ; — वे ही (शक्तियाँ) ; — निर्विषय होने के कारण (विषय-रहित होने के कारण) ; — अस्फुट (अव्यक्त) में

उसमें शक्ति-भेद से ही प्रमाताओं का भेद है; और वह स्फुटीकरण के लिए सकल आदि क्रम से कहा जाता है। उसमें सकल की शक्ति विद्या एवं कला में (है), क्योंकि उसका विशेष-रूप बुद्धि- एवं कर्म-इन्द्रिय की शक्तियों से बना है; किन्तु प्रलयाकल की वे ही (शक्तियाँ) निर्विषय होने के कारण अस्फुट (अव्यक्त) में (रहती हैं)।