The Essence of the Tantra· 9.8 / 53

The Essence of the Tantra9.8

9.8

विज्ञानाकलस्य ते एव विगलत्कल्पे तत्संस्कारसचिवा प्रबुध्यमाना शुद्धविद्या मन्त्रस्य

Transliteration (IAST)

vijñānākalasya te eva vigalatkalpe tatsaṃskārasacivā prabudhyamānā śuddhavidyā mantrasya

— विज्ञानाकल की ; — वे ही (शक्तियाँ) ; — विगलत्-कल्प (प्राय: विलीन) अवस्था में ; — उस (मायीय) संस्कार से सहित ; — प्रबुध्यमान — जागृत होती हुई ; — शुद्धविद्या ; — मन्त्र (प्रमाता) की

विज्ञानाकल की वे ही (शक्तियाँ) विगलत्-कल्प (प्राय: विलीन) अवस्था में (रहती हैं); और मन्त्र की उस संस्कार से सहित, प्रबुध्यमान शुद्धविद्या (होती है)।