The Essence of the Tantra· 9.6 / 53

The Essence of the Tantra9.6

9.6

प्रमातॄणां शिवात् प्रभृति सकलान्तानां तावताम् उक्तत्वात्

Transliteration (IAST)

pramātṝṇāṃ śivāt prabhṛti sakalāntānāṃ tāvatām uktatvāt

— प्रमाताओं के ; — शिव से लेकर ; — सकल-पर्यन्त ; — उतने ही (सात) के ; — कहे जाने के कारण

क्योंकि शिव से लेकर सकल-पर्यन्त प्रमाता उतने ही कहे गये हैं।