The Essence of the Tantra· 9.5 / 53

The Essence of the Tantra9.5

9.5

शक्तिमद्रूपप्रधाने तु प्रमातृवर्गे यत् विश्रान्तं तच् छक्तिमच् छिवरूपं श्रीमत्पराभट्टारिकानुग्रहात् तद् अपि सप्तविधम्

Transliteration (IAST)

śaktimadrūpapradhāne tu pramātṛvarge yat viśrāntaṃ tac chaktimac chivarūpaṃ śrīmatparābhaṭṭārikānugrahāt tad api saptavidham

— शक्तिमत्-रूप-प्रधान (जिसमें शक्तिधारक का रूप प्रधान है) ; — प्रमातृ-वर्ग में ; — विश्रान्त — विश्राम-प्राप्त ; — शक्तिमत् — शक्ति से युक्त ; — शिव-रूप ; — श्रीमती परा भट्टारिका (परम देवी) के अनुग्रह से ; — वह भी सात प्रकार का

किन्तु शक्तिमत्-रूप-प्रधान प्रमातृ-वर्ग में जो विश्रान्त है, वह शक्तिमत् शिव-रूप है, श्रीमती परा भट्टारिका के अनुग्रह से; वह भी सात प्रकार का है।