The Essence of the Tantra· 8.56 / 93

The Essence of the Tantra8.56

8.56

संविदो मायया अपहस्तितत्वेन कलादीनाम् उपरिपातिनां कञ्चुकवत् अवस्थानात्

Transliteration (IAST)

saṃvido māyayā apahastitatvena kalādīnām uparipātināṃ kañcukavat avasthānāt

— संवित् का ; — माया से अपहस्तित (पीछे ढकेले जाने) के कारण ; — ऊपर पड़ते हुए (कला आदि का) ; — कञ्चुक (कवच) की भाँति ; — अवस्थान (स्थित रहने) के कारण

क्योंकि माया से संवित् के अपहस्तित (पीछे ढकेले जाने) के कारण कला आदि उसके ऊपर पड़ते हुए कञ्चुक (कवच) की भाँति अवस्थित रहते हैं।