The Essence of the Tantra· 3.32 / 34

The Essence of the Tantra3.32

3.32

एते च शक्तिरूपा एव शुद्धाः परामर्शाः शुद्धविद्यायां परापररूपत्वेन मायोन्मेषमात्रसङ्कोचात् विद्याविद्येश्वररूपतां भजन्ते

Transliteration (IAST)

ete ca śaktirūpā eva śuddhāḥ parāmarśāḥ śuddhavidyāyāṃ parāpararūpatvena māyonmeṣamātrasaṅkocāt vidyāvidyeśvararūpatāṃ bhajante

— शक्ति-रूप ; — शुद्ध परामर्श ; — शुद्धविद्या में (शुद्धविद्या-तत्त्व में) ; — परापर-रूप से (पर-तथा-अपर रूप में) ; — माया के उन्मेष-मात्र के संकोच के कारण ; — विद्या एवं विद्येश्वर की रूपता ; — धारण करते हैं, ग्रहण करते हैं

और ये शक्ति-रूप ही शुद्ध परामर्श शुद्धविद्या में परापर-रूप से, माया के उन्मेष-मात्र के संकोच के कारण, विद्या एवं विद्येश्वर की रूपता को धारण करते हैं।