The Essence of the Tantra· 3.31 / 34

The Essence of the Tantra3.31

3.31

ता एव एताः परामर्शरूपत्वात् शक्तयो भगवत्यः श्रीकालिका इति निरुक्ताः

Transliteration (IAST)

tā eva etāḥ parāmarśarūpatvāt śaktayo bhagavatyaḥ śrīkālikā iti niruktāḥ

— वही ये (शक्तियाँ) ; — परामर्श-रूप होने के कारण ; — भगवती शक्तियाँ — देवियाँ ; — श्रीकालिका ; — निरुक्त — व्युत्पत्ति से बतायी गयीं

वही ये (शक्तियाँ) परामर्श-रूप होने के कारण भगवती शक्तियाँ — श्रीकालिका — कही गयी हैं।