The Essence of the Tantra· 3.30 / 34

The Essence of the Tantra3.30

3.30

वस्तुतस् तु षट् एव परामर्शाः प्रसरणप्रतिसञ्चरणयोगेन द्वादश भवन्तः परमेश्वरस्य विश्वशक्तिपूर्णत्वं पुष्णन्ति

Transliteration (IAST)

vastutas tu ṣaṭ eva parāmarśāḥ prasaraṇapratisañcaraṇayogena dvādaśa bhavantaḥ parameśvarasya viśvaśaktipūrṇatvaṃ puṣṇanti

— वस्तुतः, यथार्थतः ; — केवल छह परामर्श ; — प्रसरण और प्रतिसञ्चरण के योग से ; — बारह बनकर ; — विश्व-शक्ति-पूर्णता — समस्त शक्तियों से पूर्णता ; — पुष्ट करते हैं, परिपूर्ण करते हैं

किन्तु वस्तुतः परामर्श छह ही हैं; प्रसरण और प्रतिसञ्चरण के योग से बारह बनकर वे परमेश्वर की विश्व-शक्ति-पूर्णता को पुष्ट करते हैं।