स्वात्मान्योन्यावेशात् शान्तान्यत्वे द्वयोर् द्वयात्मत्वात् । शक्तिस् तु तद्वद् उदितां सृष्टिं पुष्णाति नो तद्वान्
Transliteration (IAST)
svātmānyonyāveśāt śāntānyatve dvayor dvayātmatvāt | śaktis tu tadvad uditāṃ sṛṣṭiṃ puṣṇāti no tadvān
अपने स्वरूप के परस्पर आवेश से, शान्त एवं अन्य (उदित) में, दोनों के द्वय-आत्मक होने के कारण (युगपत् उदय होता है)। किन्तु शक्ति वैसे ही उदित सृष्टि को पुष्ट करती है, शक्तिमान् (वीर) नहीं।