The Essence of the Tantra· 22.25 / 53

The Essence of the Tantra22.25

22.25

तद्ध्रुवधामानुत्तरम् उभयात्मकजगद् उदारम् आनन्दम् । नो शान्तं नाप्य् उदितं शान्तोदितसूतिकारणं परं कौलम्

Transliteration (IAST)

taddhruvadhāmānuttaram ubhayātmakajagad udāram ānandam | no śāntaṃ nāpy uditaṃ śāntoditasūtikāraṇaṃ paraṃ kaulam

— वह ध्रुव-धाम ; — अनुत्तर ; — उभय-आत्मक जगत् रूप उदार आनन्द ; — न शान्त, न उदित ; — शान्त एवं उदित (दोनों) का सूति-कारण (जन्म-स्थान) ; — परम कौल (तत्त्व)

वह ध्रुव-धाम अनुत्तर है — उभय-आत्मक जगत् रूप उदार आनन्द; न शान्त, न उदित (किन्तु) शान्त एवं उदित (दोनों) का सूति-कारण (जन्म-स्थान), परम कौल (तत्त्व) है।