The Essence of the Tantra· 12.3 / 10

The Essence of the Tantra12.3

12.3

कालुष्यापगमो हि शुद्धिः कालुष्यं च तदेकरूपे ऽपि अतत्स्वभावरूपान्तरसंवलनाभिमानः

Transliteration (IAST)

kāluṣyāpagamo hi śuddhiḥ kāluṣyaṃ ca tadekarūpe 'pi atatsvabhāvarūpāntarasaṃvalanābhimānaḥ

— कालुष्य (मलिनता) का अपगम ; — शुद्धि — पवित्रता ; — कालुष्य — मलिनता, अशुद्धि ; — उस एक-रूप (आत्मा) में ; — अतत्-स्वभाव अन्य रूप के संवलन (मिश्रण) का अभिमान

क्योंकि कालुष्य (मलिनता) का अपगम (दूर होना) ही शुद्धि है; और कालुष्य — उस एक-रूप (आत्मा) में भी अतत्-स्वभाव (उससे भिन्न स्वभाव वाले) अन्य रूप के संवलन (मिश्रण) का अभिमान है।