— जाग्रत् आदि (अवस्थाओं के) भेद में (अधिकरण कारक — समासगत); — भी (अव्यय); — उससे (अर्थात् स्व-स्वरूप से) अभिन्न (अधिकरण कारक — समासगत); — फैलता है, प्रसरित होता है (वर्तमान काल); — नहीं हटता, विरत नहीं होता (वर्तमान काल); — अपने (स्वरूप) से — पु.पञ्चमी एक.; — कदापि नहीं (निषेध + निश्चयार्थक); — अपने स्वभाव से (अपादान कारक); — उपलब्धा (अनुभोक्ता / प्रत्यक्षकर्ता) के रूप से (अपादान कारक)
जाग्रत् आदि (अवस्थाओं के) भेद में फैलते हुए भी वह उनसे अभिन्न रहता है; अपने स्वभाव से — उपलब्धा (अनुभवकर्ता-रूप) से — वह कभी नहीं हटता।