विज्ञातं जायते पुंसां यद्यप्येवमवस्थितम् ।
तथापि चित्रकर्मार्थमुपायो वाच्य आदरात् ॥९॥
vijñātaṃ jāyate puṃsāṃ yadyapyevamavasthitam |
tathāpi citrakarmārthamupāyo vācya ādarāt
यद्यपि पुरुषों के लिए विज्ञात (प्रत्यभिज्ञान) इस प्रकार (बिना अन्य साधन के) अवस्थित होकर उत्पन्न होता है, तथापि चित्र-कर्म (विविध विशेष शक्ति-प्रयोग) के लिए उपाय आदरपूर्वक कहा जाना चाहिए।