The Vision of Śiva· 7.9 / 122

The Vision of Śiva7.9

7.9
विज्ञातं जायते पुंसां यद्यप्येवमवस्थितम् । तथापि चित्रकर्मार्थमुपायो वाच्य आदरात् ॥९॥
vijñātaṃ jāyate puṃsāṃ yadyapyevamavasthitam | tathāpi citrakarmārthamupāyo vācya ādarāt
— विज्ञात (प्रत्यभिज्ञान) ; — उत्पन्न होता है ; — पुरुषों के लिए ; — यद्यपि ; — इस प्रकार अवस्थित ; — तथापि ; — चित्र-कर्म (विविध विशेष शक्ति-प्रयोग) के लिए ; — उपाय ; — कहा जाना चाहिए ; — आदरपूर्वक

यद्यपि पुरुषों के लिए विज्ञात (प्रत्यभिज्ञान) इस प्रकार (बिना अन्य साधन के) अवस्थित होकर उत्पन्न होता है, तथापि चित्र-कर्म (विविध विशेष शक्ति-प्रयोग) के लिए उपाय आदरपूर्वक कहा जाना चाहिए।