The Vision of Śiva· 7.8 / 122

The Vision of Śiva7.8

7.8
तस्माच्छिवेऽप्यविज्ञाते ज्ञाते वा शिव एव ते । सर्व एवात् एवैतद्भावनाकरणाच्च्युतम् ॥८॥
tasmācchive'pyavijñāte jñāte vā śiva eva te | sarva evāt evaitadbhāvanākaraṇāccyutam
— इसलिए ; — शिव के साथ भी ; — अविज्ञात ; — अथवा ज्ञात ; — शिव ही ; — वे (सब पदार्थ) ; — सब समानरूप से ; — इसी कारण से ; — यह ; — भावना-करण (की अपेक्षा) से ; — च्युत (मुक्त)

इसलिए, शिव अविज्ञात हो अथवा ज्ञात, वे सब (पदार्थ) शिव ही हैं; और इसी कारण से यह (प्रत्यभिज्ञा) भावना-करण (अभ्यासरूप साधन) की (अपेक्षा) से च्युत (मुक्त) है।