तस्माच्छिवेऽप्यविज्ञाते ज्ञाते वा शिव एव ते ।
सर्व एवात् एवैतद्भावनाकरणाच्च्युतम् ॥८॥
tasmācchive'pyavijñāte jñāte vā śiva eva te |
sarva evāt evaitadbhāvanākaraṇāccyutam
इसलिए, शिव अविज्ञात हो अथवा ज्ञात, वे सब (पदार्थ) शिव ही हैं; और इसी कारण से यह (प्रत्यभिज्ञा) भावना-करण (अभ्यासरूप साधन) की (अपेक्षा) से च्युत (मुक्त) है।