The Vision of Śiva· 7.69 / 122

The Vision of Śiva7.69

7.69
नैतच्छास्त्रं विना प्रोक्तं कायाकारेण कायिकम् । जलेन जलरूपं स्यादित्याद्यैर्वचनैः स्मृतम् ॥६९॥
naitacchāstraṃ vinā proktaṃ kāyākāreṇa kāyikam | jalena jalarūpaṃ syādityādyairvacanaiḥ smṛtam
— यह नहीं ; — शास्त्र के बिना ; — कहा गया ; — काय-आकार (शरीर-रूप) से ; — कायिक (शरीर-सम्बन्धी) ; — जल (के तादात्म्य) से ; — जलरूप ; — हो जाए ; — इत्यादि वचनों से ; — स्मृत (अभिलिखित)

यह शास्त्र के बिना नहीं कहा गया: कि काय-आकार (शरीर-रूप धारण) से कायिक (शरीर-सम्बन्धी सिद्धि होती है), जल (के साथ तादात्म्य) से (साधक) जलरूप हो जाए — इत्यादि वचनों से (यह) स्मृत (परम्परा में अभिलिखित) है।