सर्वाकाराभिमानेन ममेतिदृढसक्तिना ।
सर्वाकारसमापत्तिरनन्तैवोपजायते ॥६८॥
sarvākārābhimānena mametidṛḍhasaktinā |
sarvākārasamāpattiranantaivopajāyate
समस्त आकारों के अभिमान (तादात्म्य) के द्वारा, 'यह मेरा है' इस दृढ़ सक्ति (आसक्ति) के साथ, समस्त आकारों की समापत्ति (प्राप्ति) — अनन्त ही — उत्पन्न होती है।