The Vision of Śiva· 7.68 / 122

The Vision of Śiva7.68

7.68
सर्वाकाराभिमानेन ममेतिदृढसक्तिना । सर्वाकारसमापत्तिरनन्तैवोपजायते ॥६८॥
sarvākārābhimānena mametidṛḍhasaktinā | sarvākārasamāpattiranantaivopajāyate
— समस्त आकारों के अभिमान से ; — 'यह मेरा' इस दृढ़ सक्ति के साथ ; — समस्त आकारों की समापत्ति ; — अनन्त ही ; — उत्पन्न होती है

समस्त आकारों के अभिमान (तादात्म्य) के द्वारा, 'यह मेरा है' इस दृढ़ सक्ति (आसक्ति) के साथ, समस्त आकारों की समापत्ति (प्राप्ति) — अनन्त ही — उत्पन्न होती है।