The Vision of Śiva· 7.67 / 122

The Vision of Śiva7.67

7.67
नियमे सर्वयमनं कैवल्यं प्रलयाकले । स्वात्मनो ह्यनिरुद्धार्था निरुपाधिविभूतिका ॥६७॥
niyame sarvayamanaṃ kaivalyaṃ pralayākale | svātmano hyaniruddhārthā nirupādhivibhūtikā
— नियम (संयम) में ; — सबका यमन (नियन्त्रण) ; — कैवल्य (विमुक्ति) ; — प्रलयाकल (तत्त्व) में ; — अपने आत्मा की ; — निश्चय ही ; — अनिरुद्ध अर्थों वाली ; — निरुपाधि विभूति वाली

नियम (संयम-शक्ति) में सबका यमन (नियन्त्रण); प्रलयाकल (तत्त्व) में कैवल्य (विमुक्ति); (ऐसी ही महिमा) अपने आत्मा की है — जिसके अर्थ (विषय) अनिरुद्ध (अबाधित) हैं, तथा जिसकी विभूति निरुपाधि (उपाधि-रहित) है।