नियमे सर्वयमनं कैवल्यं प्रलयाकले ।
स्वात्मनो ह्यनिरुद्धार्था निरुपाधिविभूतिका ॥६७॥
niyame sarvayamanaṃ kaivalyaṃ pralayākale |
svātmano hyaniruddhārthā nirupādhivibhūtikā
नियम (संयम-शक्ति) में सबका यमन (नियन्त्रण); प्रलयाकल (तत्त्व) में कैवल्य (विमुक्ति); (ऐसी ही महिमा) अपने आत्मा की है — जिसके अर्थ (विषय) अनिरुद्ध (अबाधित) हैं, तथा जिसकी विभूति निरुपाधि (उपाधि-रहित) है।