ईशे समग्रकर्तृत्वं सरस्वत्या मनूत्तमः ।
प्रमेये ममतावेशान्निर्मिणोति नवं जगत् ॥६५॥
īśe samagrakartṛtvaṃ sarasvatyā manūttamaḥ |
prameye mamatāveśānnirmiṇoti navaṃ jagat
ईश (तत्त्व) में समग्र कर्तृत्व (रहता है); और सरस्वती (वाक्-शक्ति) के द्वारा मनूत्तम (श्रेष्ठ साधक) प्रमेय (ज्ञेय वस्तु) में 'यह मेरा है' इस ममता के आवेश से नवीन जगत् का निर्माण करता है।