The Vision of Śiva· 7.62 / 122

The Vision of Śiva7.62

7.62
सदा क्रीडावशादेव कामाः स्युः सर्वगोचराः । विशेषममतावेशप्रवेशवशतो महान् ॥६२॥
sadā krīḍāvaśādeva kāmāḥ syuḥ sarvagocarāḥ | viśeṣamamatāveśapraveśavaśato mahān
— सदा ; — क्रीड़ा के वश से ही ; — कामनाएँ ; — हो जाएँ ; — समस्त गोचर (विषयों) में व्याप्त ; — विशेष 'यह मेरा' इस ममता के आवेश के प्रवेश के वश से ; — महान् (अवस्था)

सदा (केवल) क्रीड़ा के वश से ही (साधक की) कामनाएँ समस्त गोचर (विषयों) में व्याप्त हो जाएँ; और विशेष 'यह मेरा है' इस ममता के आवेश के प्रवेश के वश से महान् (अवस्था उदित होती है — जो आगे कही जाती है)।