तनुस्वरूपनिर्माणापरिमाणभवोदयः ।
शिवतत्त्वे त्रिधाभूते स्वच्छाकालकलाकले ॥६३॥
tanusvarūpanirmāṇāparimāṇabhavodayaḥ |
śivatattve tridhābhūte svacchākālakalākale
शरीरों तथा रूपों का निर्माण करने वाली अपरिमित (असीम) भव (अस्तित्व) का उदय (होता है) — स्वच्छ (शिव), काल-कला, तथा कला-युक्त (इन) तीन रूपों में हुए शिवतत्त्व में।