The Vision of Śiva· 7.51 / 122

The Vision of Śiva7.51

7.51
सर्वकामदुघा साध्वी शिवता प्रसरेन्नृणाम् । पदस्यार्थः पदार्थत्वमित्थमर्थव्यवस्थितौ ॥५१॥
sarvakāmadughā sādhvī śivatā prasarennṛṇām | padasyārthaḥ padārthatvamitthamarthavyavasthitau
— सर्वकामदुघा (कामधेनु-सदृश) ; — साध्वी (कल्याणमयी) ; — शिवता ; — प्रसृत हो जाए ; — मनुष्यों के लिए ; — पद (शब्द) का अर्थ ; — पदार्थत्व (वस्तुत्व) ; — इस प्रकार ; — अर्थ-व्यवस्थिति में

सर्वकामदुघा (समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाली, कामधेनु-सदृश), साध्वी (कल्याणमयी) शिवता मनुष्यों के लिए प्रसृत (विस्तृत) हो जाए; पद (शब्द) का अर्थ ही पदार्थत्व (वस्तुत्व) है — इस प्रकार अर्थ-व्यवस्थिति (वस्तु के निर्धारण) में (प्रत्येक शब्द भी एक परम सत्ता पर आश्रित है)।