The Vision of Śiva· 7.5 / 122

The Vision of Śiva7.5

7.5
सकृज्ज्ञाते सुवर्णे हि भावना करणं व्रजेत् । एकवारं प्रमाणेन शास्त्राद्वा गुरुवाक्यतः ॥५॥
sakṛjjñāte suvarṇe hi bhāvanā karaṇaṃ vrajet | ekavāraṃ pramāṇena śāstrādvā guruvākyataḥ
— एक बार ज्ञात होने पर ; — सुवर्ण के ; — निश्चय ही ; — भावना (अभ्यास) ; — करण (उपाय) ; — क्या बनेगी? ; — एक बार ; — प्रमाण के द्वारा ; — अथवा शास्त्र से ; — गुरु के वाक्य से

सुवर्ण के एक बार ज्ञात हो जाने पर — (चाहे) एक बार प्रमाण के द्वारा, अथवा शास्त्र से, अथवा गुरु के वाक्य से — क्या (आगे की) भावना (अभ्यास) करण (साधक उपाय) बनेगी (— इसी प्रकार शिवत्व के विषय में भी)?