The Vision of Śiva· 7.39 / 122

The Vision of Śiva7.39

7.39
अन्यदेहे तथावृत्तेस्तथा बुद्धिविशिष्टता । भावनातीतनिर्मूलसत्कार्यादिविसर्गवत् ॥३९॥
anyadehe tathāvṛttestathā buddhiviśiṣṭatā | bhāvanātītanirmūlasatkāryādivisargavat
— अन्य के शरीर में ; — वैसी वृत्ति (प्रवृत्ति) से ; — उसी प्रकार ; — बुद्धि की विशिष्टता (विशेष प्रज्ञा) ; — भावना से अतीत, निर्मूल (अकारण), सत्कार्य आदि के विसर्ग के समान

अन्य के शरीर में भी, (आत्मा के) वैसी (योग द्वारा) वृत्ति (प्रवृत्ति) से, उसी प्रकार बुद्धि की विशिष्टता (विशेष प्रज्ञा) (उत्पन्न होती है) — भावना से अतीत, निर्मूल (अकारण), तथा पूर्व-विद्यमान सत्कार्य आदि के विसर्ग (स्वत:स्फूर्त उत्सर्जन) के समान।