अन्यदेहे तथावृत्तेस्तथा बुद्धिविशिष्टता ।
भावनातीतनिर्मूलसत्कार्यादिविसर्गवत् ॥३९॥
anyadehe tathāvṛttestathā buddhiviśiṣṭatā |
bhāvanātītanirmūlasatkāryādivisargavat
अन्य के शरीर में भी, (आत्मा के) वैसी (योग द्वारा) वृत्ति (प्रवृत्ति) से, उसी प्रकार बुद्धि की विशिष्टता (विशेष प्रज्ञा) (उत्पन्न होती है) — भावना से अतीत, निर्मूल (अकारण), तथा पूर्व-विद्यमान सत्कार्य आदि के विसर्ग (स्वत:स्फूर्त उत्सर्जन) के समान।