The Vision of Śiva· 7.30 / 122

The Vision of Śiva7.30

7.30
क्रियाशक्तिपरात्मत्वे क्वचित्पिण्डशिवात्मता । क्वचिदन्तःकृतौ ज्ञानाद्भवेत्पदशिवात्मता ॥३०॥
kriyāśaktiparātmatve kvacitpiṇḍaśivātmatā | kvacidantaḥkṛtau jñānādbhavetpadaśivātmatā
— क्रिया-शक्ति की परात्मता होने पर ; — कहीं ; — पिण्ड-शिवात्मता ; — कहीं ; — अन्त:कृति में ; — ज्ञान से ; — हो जाती है ; — पद-शिवात्मता

क्रिया-शक्ति की परात्मता (प्रधानता) होने पर कहीं पिण्ड-शिवात्मता (पिण्डरूप में शिव से तादात्म्य) होती है; (और) कहीं अन्त:कृति (आन्तरिक प्रवृत्ति) में ज्ञान से पद-शिवात्मता (पदरूप में शिव से तादात्म्य) हो जाती है।