इच्छामात्रे रूपशिवस्तरंगे तदतीतता ।
कर्तृमात्रे सर्वभावव्यतीतशिवभावता ॥३१॥
icchāmātre rūpaśivastaraṃge tadatītatā |
kartṛmātre sarvabhāvavyatītaśivabhāvatā
इच्छामात्र (शुद्ध इच्छा की अवस्था) में रूप-शिव (रूप-स्वरूप शिव) (होता है); तरंग (अभिव्यक्ति की उठती लहर) में उसका भी अतीतत्व (अतिक्रमण); (और) कर्तृमात्र (शुद्ध कर्तृत्व की अवस्था) में समस्त भावों से व्यतीत (परे) शिव-भावता।