The Vision of Śiva· 7.31 / 122

The Vision of Śiva7.31

7.31
इच्छामात्रे रूपशिवस्तरंगे तदतीतता । कर्तृमात्रे सर्वभावव्यतीतशिवभावता ॥३१॥
icchāmātre rūpaśivastaraṃge tadatītatā | kartṛmātre sarvabhāvavyatītaśivabhāvatā
— इच्छामात्र में ; — रूप-शिव ; — तरंग में ; — उसका भी अतीतत्व ; — कर्तृमात्र में ; — समस्त भावों से व्यतीत शिव-भावता

इच्छामात्र (शुद्ध इच्छा की अवस्था) में रूप-शिव (रूप-स्वरूप शिव) (होता है); तरंग (अभिव्यक्ति की उठती लहर) में उसका भी अतीतत्व (अतिक्रमण); (और) कर्तृमात्र (शुद्ध कर्तृत्व की अवस्था) में समस्त भावों से व्यतीत (परे) शिव-भावता।