The Vision of Śiva· 7.29 / 122

The Vision of Śiva7.29

7.29
तत्त्वं देवस्तथा तावद्भावशक्त्या घटादिक । निजशक्तिसमाविष्टेरायान्ति शिवसम्पदः ॥२९॥
tattvaṃ devastathā tāvadbhāvaśaktyā ghaṭādika | nijaśaktisamāviṣṭerāyānti śivasampadaḥ
— (प्रत्येक) तत्त्व ; — देव ; — उसी प्रकार उतना ही ; — भाव-शक्ति के द्वारा ; — घट आदि ; — निज शक्ति से समाविष्ट होने के कारण ; — प्राप्त होते हैं ; — शिव-सम्पदाओं को

(प्रत्येक) तत्त्व देव है; और उसी प्रकार उतना ही, भाव-शक्ति (अस्तित्व की शक्ति) के द्वारा घट आदि (भी देव हैं)। (शिव के) निज शक्ति से समाविष्ट (प्रवेश) होने के कारण (सब पदार्थ) शिव-सम्पदाओं (शिव के ऐश्वर्यों) को प्राप्त होते हैं।