समला तत्समाश्लेषात् सर्वेशित्वसमुद्गमः ।
तस्य शक्तिप्रदीपस्य किरणाभोद्यमप्रदा ॥२६॥
samalā tatsamāśleṣāt sarveśitvasamudgamaḥ |
tasya śaktipradīpasya kiraṇābhodyamapradā
(वह शक्ति,) उस (परिमित उपाधि) के समाश्लेष (संपर्क) से अब समला (मलयुक्त) होकर, सर्वेशित्व (सार्वभौम स्वामित्व) का समुद्गम (उदय करती है); वह उस शक्तिरूप प्रदीप के किरणों के समान आभा-उद्यम (दीप्ति के उद्गम) को प्रदान करने वाली है।