The Vision of Śiva· 7.25 / 122

The Vision of Śiva7.25

7.25
तेजःकणप्रसरवदुपलभ्या वियत्यलम् । स्थितिः सादाशिवी चासावधिकाराभिमानता ॥२५॥
tejaḥkaṇaprasaravadupalabhyā viyatyalam | sthitiḥ sādāśivī cāsāvadhikārābhimānatā
— तेज:कण के प्रसार के समान ; — उपलभ्य (अनुभवनीय) ; — वियत् (चित् के व्योम) में ; — भलीभाँति ; — स्थिति ; — सादाशिवी ; — और यह ; — अधिकार का अभिमान (ग्रहण)

तेज:कण (प्रकाश-कण) के प्रसार के समान, (वह शक्ति) वियत् (चित् के व्योम) में भलीभाँति उपलभ्य (अनुभवनीय) है; और यही सादाशिवी स्थिति है — (विश्व-)अधिकार का अभिमान (ग्रहण)।