न्यग्भूतेच्छा ज्ञानमयी स्पन्दनाविततांगिनी ।
विद्यामन्त्रकलाकल्प्यदेहसंपिण्डितोद्भवा ॥२४॥
nyagbhūtecchā jñānamayī spandanāvitatāṃginī |
vidyāmantrakalākalpyadehasaṃpiṇḍitodbhavā
(अब) न्यग्भूत इच्छा (निमज्जित इच्छा) वाली, ज्ञानमयी, स्पन्दन से विस्तृत अंगों वाली (वह शक्ति) — उसका उद्भव विद्या, मन्त्र और कला से कल्पित (निर्मित) देहों में संपिण्डित (एकत्रित) हो जाता है।