The Vision of Śiva· 7.24 / 122

The Vision of Śiva7.24

7.24
न्यग्भूतेच्छा ज्ञानमयी स्पन्दनाविततांगिनी । विद्यामन्त्रकलाकल्प्यदेहसंपिण्डितोद्भवा ॥२४॥
nyagbhūtecchā jñānamayī spandanāvitatāṃginī | vidyāmantrakalākalpyadehasaṃpiṇḍitodbhavā
— न्यग्भूत (निमज्जित) इच्छा वाली ; — ज्ञानमयी ; — स्पन्दन से विस्तृत अंगों वाली ; — विद्या, मन्त्र और कला से कल्पित देहों में संपिण्डित उद्भव वाली

(अब) न्यग्भूत इच्छा (निमज्जित इच्छा) वाली, ज्ञानमयी, स्पन्दन से विस्तृत अंगों वाली (वह शक्ति) — उसका उद्भव विद्या, मन्त्र और कला से कल्पित (निर्मित) देहों में संपिण्डित (एकत्रित) हो जाता है।