भासतेऽवस्थिता शक्तिः शैवी शैवार्थदायिका ।
ततः सैव स्वयं बाह्यकार्यप्राक्कलनात्मिका ॥२३॥
bhāsate'vasthitā śaktiḥ śaivī śaivārthadāyikā |
tataḥ saiva svayaṃ bāhyakāryaprākkalanātmikā
शैवी (शिव की) शक्ति अवस्थित होकर भासमान होती है, जो शैव अर्थ (शिवरूप लक्ष्य) को प्रदान करने वाली है; तदनन्तर वही (शक्ति) स्वयं बाह्य कार्य के प्राक्-कलन (पूर्व-संकल्पन) स्वरूप वाली हो जाती है।