The Vision of Śiva· 7.23 / 122

The Vision of Śiva7.23

7.23
भासतेऽवस्थिता शक्तिः शैवी शैवार्थदायिका । ततः सैव स्वयं बाह्यकार्यप्राक्कलनात्मिका ॥२३॥
bhāsate'vasthitā śaktiḥ śaivī śaivārthadāyikā | tataḥ saiva svayaṃ bāhyakāryaprākkalanātmikā
— भासमान होती है ; — अवस्थित ; — शक्ति ; — शैवी (शिव की) ; — शैव अर्थ को प्रदान करने वाली ; — तदनन्तर ; — वही (शक्ति) ; — स्वयं ; — बाह्य कार्य के प्राक्-कलन स्वरूप वाली

शैवी (शिव की) शक्ति अवस्थित होकर भासमान होती है, जो शैव अर्थ (शिवरूप लक्ष्य) को प्रदान करने वाली है; तदनन्तर वही (शक्ति) स्वयं बाह्य कार्य के प्राक्-कलन (पूर्व-संकल्पन) स्वरूप वाली हो जाती है।