The Vision of Śiva· 7.19 / 122

The Vision of Śiva7.19

7.19
तस्येच्छास्पन्दनं पूर्वन्यग्भावो ह्लादसंगमः । भूपभूपतिशक्त्याभमग्न्यं तत्पूर्णचिल्लयात् ॥१९॥
tasyecchāspandanaṃ pūrvanyagbhāvo hlādasaṃgamaḥ | bhūpabhūpatiśaktyābhamagnyaṃ tatpūrṇacillayāt
— उस (इच्छा) का ; — इच्छा-स्पन्दन ; — पूर्व-न्यग्भाव (प्रथम अन्तर्मुखी निमज्जन) ; — आह्लाद का संगम ; — राजा तथा भूपति-शक्ति के सादृश्य वाला ; — अग्निमय (दीप्त) ; — उस पूर्ण चित् में लय के कारण

उस (इच्छा) का इच्छा-स्पन्दन (इच्छारूप कम्पन) पूर्व-न्यग्भाव (प्रथम अन्तर्मुखी निमज्जन) तथा आह्लाद (आनन्द) के संगम वाला है; (वह) भूप (राजा) तथा भूपति-शक्ति के सादृश्य वाला, और अग्निमय (दीप्त) है, उस पूर्ण चित् में लय के कारण।