प्रथमोदय इच्छायाः सर्वभावैक्यदेश्यता ।
स एव शाक्तबोधात्मस्वच्छावयवरूपवान् ॥१७॥
prathamodaya icchāyāḥ sarvabhāvaikyadeśyatā |
sa eva śāktabodhātmasvacchāvayavarūpavān
इच्छा के प्रथम उदय में समस्त भावों के ऐक्य का देश्यत्व (संकेत) रहता है; वही (इच्छा) शाक्त बोध (शक्तिरूप अनुभूति) रूप स्वच्छ अवयवों वाले रूप से युक्त है।