The Vision of Śiva· 7.17 / 122

The Vision of Śiva7.17

7.17
प्रथमोदय इच्छायाः सर्वभावैक्यदेश्यता । स एव शाक्तबोधात्मस्वच्छावयवरूपवान् ॥१७॥
prathamodaya icchāyāḥ sarvabhāvaikyadeśyatā | sa eva śāktabodhātmasvacchāvayavarūpavān
— प्रथम उदय में ; — इच्छा के ; — समस्त भावों के ऐक्य का देश्यत्व (संकेत) ; — वही (इच्छा) ; — शाक्त बोधरूप स्वच्छ अवयवों वाले रूप से युक्त

इच्छा के प्रथम उदय में समस्त भावों के ऐक्य का देश्यत्व (संकेत) रहता है; वही (इच्छा) शाक्त बोध (शक्तिरूप अनुभूति) रूप स्वच्छ अवयवों वाले रूप से युक्त है।