न द्रव्यव्यतिरिक्तास्ति क्रिया नच न विद्यते ।
न तयापि विना कार्यं किंचनापि हि जायते ॥१५॥
na dravyavyatiriktāsti kriyā naca na vidyate |
na tayāpi vinā kāryaṃ kiṃcanāpi hi jāyate
क्रिया द्रव्य से व्यतिरिक्त (भिन्न) नहीं है, और फिर भी वह विद्यमान नहीं — ऐसा नहीं (अर्थात् वह सत्ता-रहित भी नहीं); और उसके बिना तो कोई भी कार्य उत्पन्न नहीं होता।