The Vision of Śiva· 7.14 / 122

The Vision of Śiva7.14

7.14
शवला चितिरुच्येत परस्य पररूपिणी । सा शक्तिः परमेशस्य संस्थिता द्रव्यकर्मवत् ॥१४॥
śavalā citirucyeta parasya pararūpiṇī | sā śaktiḥ parameśasya saṃsthitā dravyakarmavat
— शवला (नानावर्णा, विचित्र) ; — चिति ; — कही जा सकती है ; — परम (शिव) की ; — परम के रूप वाली ; — वह शक्ति ; — परमेश्वर की ; — अवस्थित ; — द्रव्य और कर्म के समान

वह शवला (विचित्र, नानावर्णा) चिति परम (शिव) की (शक्ति) कही जा सकती है, जो परम के ही रूप वाली है; परमेश्वर की वह शक्ति (उनसे अभिन्न रूप में) अवस्थित रहती है, जैसे द्रव्य और कर्म (अभिन्न रहते हैं)।