समस्तचित्रकार्यान्तर्गर्भिणी शिंबिकाकृतिः ।
स्वरूपाह्लादनिर्मुक्तिरहितेच्छोदयोद्गमः ॥१३॥
samastacitrakāryāntargarbhiṇī śiṃbikākṛtiḥ |
svarūpāhlādanirmuktirahitecchodayodgamaḥ
(वह इच्छा) समस्त चित्र (विविध) कार्यों को अपने भीतर गर्भित (समाये) रखने वाली, शिंबिका (फली) के आकार वाली है; इच्छा के उद्गम का उदय (शिव के) स्वरूप-आह्लाद (निज आनन्द) से अविमुक्त (अभिन्न) रहता है।