The Vision of Śiva· 7.109 / 122

The Vision of Śiva7.109

7.109
कैलासाद्रौ भ्रमन् देवो मूर्त्या श्रीकंठरूपया । अनुग्रहायावतीर्णश्चोदयामास भूतले ॥१०९॥
kailāsādrau bhraman devo mūrtyā śrīkaṃṭharūpayā | anugrahāyāvatīrṇaścodayāmāsa bhūtale
— कैलास-पर्वत पर ; — विचरण करते हुए ; — देव (शिव) ; — मूर्ति से ; — श्रीकण्ठ के रूप वाली ; — अनुग्रह के लिए ; — अवतीर्ण होकर ; — प्रेरित किया (नियुक्त किया) ; — भूतल पर

— कैलास-पर्वत पर श्रीकण्ठ के रूप वाली मूर्ति से विचरण करते हुए देव (शिव), अनुग्रह के लिए अवतीर्ण होकर, भूतल पर (इस मुनि को) प्रेरित किया (नियुक्त किया):