The Vision of Śiva· 7.108 / 122

The Vision of Śiva7.108

7.108
कलौ प्रवृत्ते यातेषु तेषु दुर्गमगोचरे । कलापिग्रामप्रमुखे समुच्छिन्ने च शासने ॥१०८॥
kalau pravṛtte yāteṣu teṣu durgamagocare | kalāpigrāmapramukhe samucchinne ca śāsane
— कलि (युग) के प्रवृत्त होने पर ; — उन (ऋषियों) के चले जाने पर ; — दुर्गम (अगम्य) प्रदेश को ; — कलाप-ग्राम से प्रमुख ; — समुच्छिन्न (विलुप्त) होने पर ; — और शासन (उपदेश)

कलि (युग) के प्रवृत्त (आरम्भ) हो जाने पर, और उन (ऋषियों) के कलाप-ग्राम (कलाप नामक गाँव) से प्रमुख दुर्गम (अगम्य) प्रदेश को चले जाने पर, तथा शासन (परम्परागत उपदेश) के समुच्छिन्न (विलुप्त) हो जाने पर —