कलौ प्रवृत्ते यातेषु तेषु दुर्गमगोचरे ।
कलापिग्रामप्रमुखे समुच्छिन्ने च शासने ॥१०८॥
kalau pravṛtte yāteṣu teṣu durgamagocare |
kalāpigrāmapramukhe samucchinne ca śāsane
कलि (युग) के प्रवृत्त (आरम्भ) हो जाने पर, और उन (ऋषियों) के कलाप-ग्राम (कलाप नामक गाँव) से प्रमुख दुर्गम (अगम्य) प्रदेश को चले जाने पर, तथा शासन (परम्परागत उपदेश) के समुच्छिन्न (विलुप्त) हो जाने पर —