The Vision of Śiva· 7.110 / 122

The Vision of Śiva7.110

7.110
मुनिं दुर्वाससं नाम भगवानूर्ध्वरेतसम् । नोच्छिद्येत यथा शास्त्रं रहस्यं कुरु तादृशम् ॥११०॥
muniṃ durvāsasaṃ nāma bhagavānūrdhvaretasam | nocchidyeta yathā śāstraṃ rahasyaṃ kuru tādṛśam
— मुनि को ; — दुर्वासा नामक ; — भगवान् (शिव) ने ; — ऊर्ध्वरेता (ब्रह्मचारी) ; — उच्छिन्न न हो ; — जिस प्रकार ; — शास्त्र ; — रहस्य ; — 'करो!' ; — वैसा

भगवान् (शिव) ने दुर्वासा नामक उस ऊर्ध्वरेता (ब्रह्मचारी) मुनि को (यह कहकर नियुक्त किया): 'जिस प्रकार शास्त्र उच्छिन्न (विलुप्त) न हो, वैसा (ही रक्षा करने वाला) रहस्य-(संक्रमण) करो।'