The Vision of Śiva· 7.111 / 122

The Vision of Śiva7.111

7.111
ततः स भगवान् देवादादेशं प्राप्य यत्नवान् । ससर्ज मानसं पुत्रं त्र्यम्बकादित्यनामकम् ॥१११॥
tataḥ sa bhagavān devādādeśaṃ prāpya yatnavān | sasarja mānasaṃ putraṃ tryambakādityanāmakam
— तदनन्तर ; — वे भगवान् (दुर्वासा) ; — देव से ; — आदेश प्राप्त करके ; — यत्नवान् (प्रयत्नशील) ; — सृष्टि की ; — मानस पुत्र की ; — त्र्यम्बकादित्य नामक

तदनन्तर उन भगवान् (दुर्वासा) ने देव से आदेश प्राप्त करके, यत्नवान् (प्रयत्नशील) होकर, त्र्यम्बकादित्य नामक एक मानस (मन से उत्पन्न) पुत्र की सृष्टि की।