The Vision of Śiva· 7.112 / 122

The Vision of Śiva7.112

7.112
तस्मिन् संक्रमयामास रहस्यानि समन्ततः । सोऽपि गत्वा गुहां सम्यक् त्र्यम्बकाख्यां ततः परम् ॥११२॥
tasmin saṃkramayāmāsa rahasyāni samantataḥ | so'pi gatvā guhāṃ samyak tryambakākhyāṃ tataḥ param
— उस (पुत्र) में ; — संक्रमित (हस्तान्तरित) किया ; — रहस्यों को ; — समन्तत: (पूर्णरूपेण) ; — वह भी ; — जाकर ; — गुहा में ; — भलीभाँति ; — त्र्यम्बक नामक ; — तदनन्तर

उस (पुत्र) में (उन्होंने) रहस्यों को समन्तत: (पूर्णरूपेण) संक्रमित (हस्तान्तरित) किया; वह (त्र्यम्बकादित्य) भी त्र्यम्बक नामक गुहा (गुफा) में भलीभाँति जाकर, तदनन्तर (इस प्रकार किया):