तन्नाम्ना चिह्नितं तत्र ससर्ज मनसा सुतम् ।
खमुत्पपात संसिद्धस्तत्पुत्रोऽपि तथा तथा ॥११३॥
tannāmnā cihnitaṃ tatra sasarja manasā sutam |
khamutpapāta saṃsiddhastatputro'pi tathā tathā
वहाँ उस (त्र्यम्बक) नाम से चिह्नित एक पुत्र को मन से सृजा; (और वह पिता) संसिद्ध (सिद्ध) होकर आकाश में उत्पतित (उड़ गया); उसका पुत्र भी उसी-उसी प्रकार (पुत्र की सृष्टि करता रहा)।