The Vision of Śiva· 7.113 / 122

The Vision of Śiva7.113

7.113
तन्नाम्ना चिह्नितं तत्र ससर्ज मनसा सुतम् । खमुत्पपात संसिद्धस्तत्पुत्रोऽपि तथा तथा ॥११३॥
tannāmnā cihnitaṃ tatra sasarja manasā sutam | khamutpapāta saṃsiddhastatputro'pi tathā tathā
— उस नाम से ; — चिह्नित ; — वहाँ ; — सृजा ; — मन से पुत्र को ; — आकाश में उत्पतित (उड़ गया) ; — संसिद्ध (सिद्ध) होकर ; — उसका पुत्र भी ; — उसी-उसी प्रकार

वहाँ उस (त्र्यम्बक) नाम से चिह्नित एक पुत्र को मन से सृजा; (और वह पिता) संसिद्ध (सिद्ध) होकर आकाश में उत्पतित (उड़ गया); उसका पुत्र भी उसी-उसी प्रकार (पुत्र की सृष्टि करता रहा)।