The Vision of Śiva· 6.83 / 126

The Vision of Śiva6.83

6.83
अप्रत्यक्षोऽक्षसम्बन्धो दूरस्थः शक्तिरूह्यते । तस्मान्न ज्ञानशून्यत्वं न शून्यं चोपपद्यते ॥८३॥
apratyakṣo'kṣasambandho dūrasthaḥ śaktirūhyate | tasmānna jñānaśūnyatvaṃ na śūnyaṃ copapadyate
— अप्रत्यक्ष ; — इन्द्रिय के साथ सम्बन्ध ; — दूर स्थित ; — शक्ति ; — अनुमित होती है ; — इसलिए ; — नहीं ज्ञान-शून्यता ; — नहीं शून्य ; — और उपपन्न होता

(वस्तु का) इन्द्रिय के साथ सम्बन्ध अप्रत्यक्ष (होते हुए), दूर स्थित (होते हुए भी, उसकी) शक्ति अनुमित होती है; इसलिए न (कोई) ज्ञान-शून्यता है, और न ही शून्य (का सिद्धान्त) उपपन्न होता है।