The Vision of Śiva· 6.82 / 126

The Vision of Śiva6.82

6.82
उपलब्धिः पुनर्ज्ञेया प्रमाणान्तरगोचरा । धूमात्सम्बन्धतो वह्नेः परोक्षे स्फुरणं न किम् ॥८२॥
upalabdhiḥ punarjñeyā pramāṇāntaragocarā | dhūmātsambandhato vahneḥ parokṣe sphuraṇaṃ na kim
— उपलब्धि ; — और ; — जाननी चाहिए ; — अन्य प्रमाणों के गोचर वाली ; — धूम से ; — सम्बन्ध से ; — अग्नि का ; — परोक्ष में ; — स्फुरण ; — क्या नहीं

और उपलब्धि अन्य प्रमाणों (प्रत्यक्ष से भिन्न) के गोचर वाली (भी) जाननी चाहिए; धूम से, (उसके) सम्बन्ध से, अग्नि का परोक्ष (अप्रत्यक्ष) में स्फुरण क्या नहीं (होता — अतः संवित् अदृष्ट तक पहुँचती है)?